Tuesday, November 17, 2015

कम खाओ, गम खाओ

संसार में अधिकांश अधिक खाने वले रोगों के शिकार पाए जाते है । हित- मित- नियमित आहार लेनेवाले संयमी व्यक्ति ही स्वस्थ व दीर्घजीवी होते हैं । इंग्लैंड के टामस पार नियमित आहार के लिए बड़े प्रसिद्ध हुये । वे नित्य सादा, हल्का, सुपाच्य आहार लेते थे । उनहोंने ४० वर्ष की उम्र के बाद मिठाई, शराब, मांसको छुआ तक नहीं । वे सदैव निरोग व प्रसन्न रहते थे । इंग्लैंड के राजा चार्ल्स प्रथम ने उनकी कीर्ति सुनी तो उन्हें अत्यंत आश्चर्य हुआ । उनहोंने ऐसे दीर्घजीवी व्यक्ति के दर्शन करना चाहा । तामस पार को बड़े आदर से राजमहल में बुलाया ज्ञा । भरी दावत का आयोजन भी किया ज्ञा । भोजन के समय स्वादिष्ट मिठाईयाँ, विभिन्न प्रकार के पकवान और सुस्वादु मांस इत्यादी उन्हें अत्यंत आग्रहपूर्वक पड़ोसे गये । उनके पेट में दर्द होने लगा तब तक उन्हें खिलायाग्य । बेचारे मिताहारी तामस पार पार इस शाही भोजन का भयंकर दुष्प्रभाव पड़ा । उसी रात्रि उनकी मृत्यु हो गयी । उस समय उनकी आयु १५२ वर्ष की थी । एकाएक मृत्यु का कारण ढूँढा ज्ञाव इतने भारी, अस्वभाविक आहार के कारण उनके ह्रदय व पेट पार बाल पड़ा, जिससे ह्रदयगति रुक गयी और वे मृत्यु के शिकार हो गये l अत: शरीर के अंगों के साथ अति करके अपने स्वास्थ्य की इति न करें । सयम की आवयश्कता सभी को है। यह संयम सैनिकों को सुरक्षित रखता है । यह संयम साधकों की साधना में सुवास लता है । जबकि फ्रायड के विकृत मनोविज्ञान से उन देशों में लाखों युवक-युवतियाँ विनाश के रस्ते बढ़ गये । हे भारत के सपूतों ! सयंम- सदाचार व सच्चे सुख को पाने के लिए ही धरती पर तुम्हारा आगमन हुआ है ।
हिम्मत करो........... संयमी-साहसी बनो । सफलता तुम्हारे चरण चूमेगी ।
भूख से काम खाओ अथवा आधा पेट खाओ, चौथाई पानी के लिए एवम चौथाई पेट हवा के लिए खली छोडो। 
शरीर को भगवान का मंदिर समझकर, आत्म संयम और नियमितता द्वारा आरोग्य की रक्षा करेंगे।
 


"आप जितना खाते हैं उससे आधे भोजन से आपका पेट भरता है और आधे भोजन से डॉक्टरों का पेट भरता है । आप आधा भोजन ही करें तो आप बीमार ही नहीं पड़ेंगे और डॉक्टरों की कोई खास आवश्यकता नहीं रह जाएगी"

योग करने के फायदे

१. रोज योग करने से आप सेहतमंद, उत्साहित, शांत और रह सकते है।
२. योग आपको लचीला, नम्र और आपके शरीर को ताकतमन्द बनता है।
३. योग करने से शरीर के अंदर के शारीरिक एवं मानसिक तनाव को दूर करता है।
४. योग को हम धयान भी कह सकते है , योग और ध्यान दोनों को करने के लिए शांति और एकाग्रता की आवयश्कता  होती है ।
५. योग करने से हमारे शरीर के सभी जोड़ ( जॉइंट ) को मजबूत होता है ।
६. शरीर के जोड़  के अंदर चिकनाई बढ़ाना एवं नसों के अंदर के विकार को दूर करना हो  योग सर्वोत्तम उपाय है ।
७. शरीर के आंतरिक अंगों को भी स्वस्थ रखने में बहुत उपयोगी है।
८. योग से आपके अंदर आत्मविस्वास को भी बढ़ता है।
९. योग करने से आपके अंदर शारीरिक , मानसिक और आध्यात्मिक विकास होता है।
१०. योग को शांति के साथ और ठीक ढंग से करना चाहिए। Pragyayoga.blogspot.in

Friday, November 13, 2015

About Pragya Yoga

Health is a natural facet of liveliness - both by definition and realization. The ancient Indians had attributed the secret of ”jivem shardah shatam” - hundred years of vigorous, healthy, happy and creative life - to the total harmony of the mode of living with the Nature and the spiritual inheritance of life.
Their approach was focused primarily on the science of consciousness and dealt with the awakening and harmonious use of the vital power (pran shakti) in auto-regulation of the body functions rather than controlling it by adjusting the (bio)chemical reactions and physiological activities as is largely practised in the modern sciences of medicine.
After about two centuries of dominance of Allopathic and related approaches of medical treatment, its limitations and incompleteness are by and large being felt by people from all sections of the society. Now the reductionist approach to health is giving way to a more comprehensive holistic approach in which the mind, body and soul relationship is getting more and more prominent.

Please contact us for the more details and therapy about Pragya Yoga.